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Thursday, 22 September 2016

मिले वो मंजिल जो तुम चाहते हो

मिले वो मंजिल जो तुम चाहते हो
मिले वो खुशियाँ , जो तुम चाहते हो
हट जाएँ ये बिरहा की रातें
और मिल जाएँ वो मीठी-मीठी रातें
जो तुम चाहते हो
सालिहा मंसूरी

06.07.2014

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