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Tuesday, 27 September 2016

मांगी थी दुआ इक दिन

मांगी थी दुआ इक दिन
कि मेरी वीरां ज़िन्दगी में
बिखर जाएँ प्यार के रंग
लेकिन शायद मेरी किस्मत में
प्यार के रंग लिखे ही न थे
इसलिए वो दुआ कभी क़ुबूल न हो सकी
सालिहा मंसूरी

14.03.15 

1 comments:

yashoda Agrawal said...

वाह..
..
मेरी तमन्ना
न थी
तेरे बगैर रहने की ....
लेकिन
मज़बूर को ,
मज़बूर की ,
मजबूरिया..
मज़बूर
कर देती है ..!!!!
सादर

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