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Monday, 23 January 2017

कितने -ही शब्द गूंजते रहे

कितने -ही शब्द गूंजते रहे 
इन कानों में 
कितने -ही शब्द धड़कते रहे 
इस धड़कन में

कितने -ही शब्द उलझते रहे
इन साँसों में 
कितने -ही शब्द सुलगते रहे 
इन आँखों में ...... 


सालिहा मंसूरी

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