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Friday, 13 June 2014

------------------------------आमाले शबे बारात---------------------



***********************शबे बारात के फजायिल व आमाल *******************

शबे बारात में बन्दों पर रहमते इलाही का वे पायां नुजूल होता है. यानी शाबान की 15 वीं रात में लोगों पर इल्तिफाते ख़ुदा बंदी की बेपनाह बारिश होती है . आज की रात यानी शाबान की 15 वीं शब अल्लाह तआला दुनिया के आसमान की तरफ तजल्ली फरमाता है.  और कबीलये बनी क्लब की बकरियों के बालों के तादाद में उम्मत की मगफिरत फरमाता है.                           ( इब्ने माजा व तिरमिजी शरीफ )

 


हज़रत काब रदि. अंहो फरमाते हैं  कि अल्लाह तआला जन्नत को आरास्ता होने का हुक्म देता है और इस राटा में आसमान के सितारों , दुनिया के दिनों , रातों, दरख्तों के पत्तों, पहाड़ों और रेत के ज़र्रों के बराबर ( लोगों को ) जहन्नम से आजाद फरमात है      ( नजहतुल मजालिस ) 

         ------------------------------आमाले शबे बारात---------------------
 

 1. जादू  बला से महफूज़ रहने का अमल - अगर कोई शख्स शबे बारात  को बेरी के सात पत्तों  को पानी में जोश देकर उससे गुस्ल करें तो इंशा अल्लाह तआला साल भर जादू बला से और उसके असर से महफूज़ रहेगा
( इस्लामी ज़िन्दगी )

2. साबान की 14 तारीख को सूरज डूबने के वक़्त व बुजू  चालीस मर्तबा ये कलिमात पढ़े -                               "ला हऊला वला कुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलीइल अजीम "
अल्लाह तआला इस दुआ के पढने वाले के चालीस साल के गुनाह माफ़ फरमा देगा और इंशा अल्लाह वो तमाम आफतों और मुसीबतों से महफूज़ रहेगा और जन्नत में चालीस हूरें इनायत फरमाएगा  और चालीस लोगों की जो जहन्नमी हो अगर तो शफाअत करे तो वो जन्नत में दाखिल हो.

3. बाद मगरिब गुस्ल कर तो क़तरा पानी के बदले सात सौ रकाअत नफिल का सबाब पायेगा.

4. इसके बाद तहीयतुल  वजू पढ़े हर रकाअत में अलहम्दो के बाद एक बार आयतल कुर्सी , तीन बार कुल्होबल्ला  शरीफ पढ़े.

5.  दो रकाअत पढ़ें कि हर रकाअत में अलहम्दो के बाद एक बार आयतल कुर्सी 15 बार कुल्होबल्ला शरीफ और बाद सलाम 100 बार दरूद शरीफ पढ़े.
फजीलत-  रोज़ी की बरकत होगी,  रंजो ग़म से निजात, गुनाहों से बखशिश- ओ -मगफिरत होगी.

6. आठ रकअत 2-2 करके हर रकअत में अलहम्दो के बाद 5 बार कुल्होबल्ला शरीफ पढ़ें.
फजीलत- गुनाहों से पाक साफ़ होंगे, दुआएं क़ुबूल होंगीं, सबाब अज़ीम होगा

7. चार रकअत एक सलाम से इस तरह पढ़ें कि अल्हम्दो के बाद 5 बार कुल्होबल्ला शरीफ पढ़ें.
फजीलत- गुनाहों से ऐसे पाक होंगे जैसे अभी माँ के पेट से पैदा हुए हैं.

8. आठ रकअत एक सलाम से हर रकअत में अलहम्दो के बाद 11 बार कुल्होबल्ला शरीफ पढ़ें. और इसका सबाब खातूने जन्नत हज़रत फातिमा जोहरा रदिअल्लाहो तआला अन्हा को नज्र करें.
फजीलत- आप फरमाती हैं कि मैं इस नमाज़ के पढने वाले की शफाअत के बगैर जन्नत में कदम न रखूंगी.

9. सूरे यासीन शरीफ 3 बार इस नियत से पढ़ें कि पहली बार मगफिरत , दूसरी बार तबंग्री, और तीसरी बार उम्र दराजी के लिए पढ़ें.

10. सूरे दुखान - ( 25 वें पारे में ) 7 बार पढ़ें.
फजीलत- 70 दुनियवी , 70 दीनवी हाजत पूरी होगी.

11. आँखों में सुरमा इस तरह लगाएं कि 3 सलाई दायीं आँख में 2 सलाई बायीं आँख में तो साल भर तक आँख न दुखे , न दर्द हो, और न आये.

12. रोजे की फजीलत - हुजूर मकबूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया जिसने साबान की 15 वीं तारीख को एक रोजा रखा उसको मेरी शफ़ाअत हलाल होगी.  और उसे जहन्नुम की आग न छू पाएगी. और उसे 2 साल के रोजों का सबाब होगा.

13. तम्बीह शब बेदारी करने वाले हजरात नमाज़ इशा व फज़र व जमाअत अदा करें. वरना जमाअत छोड़ने का गुनाह रात की पूरी इबादत से ज्यादा होगा.

14. इस रात में चाहिए खूब- खूब गुनाहों से तौबा करें और रात भर आवाजें आती रहती हैं कि है गुनाह से बख्शिश चाहने वाला कि गुनाह बख्श दें. है कोई रोज़ी चाहने वाला कि रिज्क अता करूँ. है कोई मांगने वाला कि जो  चाहे अता करूँ यहाँ तक की ये आवाजें सुबह फज्र के वक़्त  शुरू  होने तक आती रहती हैं.

15. इस रात में हर एक नामाए आमाल अल्लाह तआला की  बारगाह में पेश होता है. और साल भर के लिए रिज्क , मौत, ज़िन्दगी, बगैरा तकसीम किया जाता है . और सबको बख्श दिया जाता है. सिवाए जादूगर, नजूमी, और रिश्ता कता करने वाले, जानी , क़ातिल जब तक कि अपने गुनाह से सच्ची तौबा न कर लें.

16. इस रात में कब्रिस्तान में जाएँ. और फातिहा पढ़कर कब्रिस्तान के सभी लोगों के लिए दुआए मगफिरत करें क्योंकि इस रात में दुआ क़ुबूल होती है.

पेश्कर्दा -
अब्दुल जलील

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