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Monday, 10 October 2016

जो आया है उसे जाना है

जो आया है उसे जाना है इक दिन
ये ज़िन्दगी इक धुंआ है,
जिसे फ़ना होना है इक दिन .....

सालिहा मंसूरी

30.07.15 5:33 pm 

1 comments:

संजय भास्‍कर said...

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति :)

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