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Wednesday, 12 October 2016

तुम अगर मिल जाते

तुम अगर मिल जाते तो
ये ज़िन्दगी का सफ़र
आसां हो जाता 

तुम अगर मिल जाते तो,
न दिन की खामोशियाँ होतीं
न रातों की तनहाइयाँ होतीं ,
तुम अगर मिल जाते तो .............

सालिहा मंसूरी

04.08.15. 12:00 am 

3 comments:

Ashutosh Dubey said...

bahut hi acchi rachna hai !
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika

संजय भास्‍कर said...

सुन्दर प्रस्तुति !
आज आपके ब्लॉग पर आकर काफी अच्छा लगा अप्पकी रचनाओ को पढ़कर , और एक अच्छे ब्लॉग फॉलो करने का अवसर मिला !

Saliha Mansoori said...

जी शुक्रिया आपका

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