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Thursday, 20 October 2016

दिलो-ज़हन

दिलो-ज़हन से उसको निकालना
आसां नहीं होता
चाहा था जिसको उम्र-भर ,
हसीं ख्वाबों की तरह ....... 

-    सालिहा मंसूरी


12.07.15.    9:44 am

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