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Tuesday, 25 October 2016

तुम्हारे वजूद का टुकड़ा

तुम्हारे वजूद का टुकड़ा
आज भी मेरे बदन से
लिपटा हुआ मेरी साँसें गिन रहा है ...... 

सालिहा मंसूरी


13.06.15 4;45 pm

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