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Monday, 6 February 2017

पल – दो – पल की खुशियाँ थीं वो

पल – दो – पल की खुशियाँ थीं वो 
पल – दो – पल के सपने 
आँख खुली तो , कुछ भी पास नहीं था 
बस ! थे कुछ बीते लम्हे ...... 

सालिहा मंसूरी 

02.01.16   05:22  pm

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