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Thursday, 9 February 2017

मिले थे तुम अजनबी राहों की तरह

मिले थे तुम अजनबी राहों की तरह 
और खो गए इक गुजरते राही की तरह 
मुझे देखकर ठिठके भी नहीं 
संभालना तो बहुत दूर की बात है ..... 

सालिहा मंसूरी 

09.01.16    04:08 pm

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