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Wednesday, 8 February 2017

किनारा मिले न मिले

किनारा मिले न मिले 
फिर भी मैं चलती जाऊँगी 
मंजिल मिले न मिले 
फिर भी मैं बढ़ती जाऊँगी 
राही रुके न रुके 
फिर भी मैं संभलती जाऊँगी ...... 

सालिहा मंसूरी 

04.01.16   07:45 am

2 comments:

kuldeep thakur said...

दिनांक 09/02/2017 को...
आप की रचना का लिंक होगा...
पांच लिंकों का आनंद... https://www.halchalwith5links.blogspot.com पर...
आप भी इस प्रस्तुति में....
सादर आमंत्रित हैं...

savan kumar said...

सुन्दर शब्द रचना
http://savanxxx.blogspot.in

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