Friday, 11 August 2017

इस रात के ख़त्म होते ही

इस रात के ख़त्म होते ही
ये स्याह अँधेरे भी ख़त्म हो जाएंगे
जब इक नई सुबह
तुम्हारे घर के आँगन में
सुनहरी धूप बनकर बरसेगी 

- सालिहा मंसूरी
09.02.16     04.10 pm 

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