Tuesday, 21 July 2015

वो अकेला कहाँ

आसमान जैसी छत हो जिसके सर पर 
वो अकेला कहाँ 
पेड़ों जैसे रही हों जिसके साथ 
वो अकेला कहाँ 
दिल में सुलगती ख़ामोशी हो जिसके पास 
वो अकेला कहाँ ..............

सालीह मंसूरी -
13 .7 .15 -12:16 pm 

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