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Friday, 14 October 2016

याद है

याद है , उस दिन
जब मैं पहली बार
तुमसे मिलने के लिए
आयी थी
और तुमने मुझे
बैठने के लिए
हाथ से
इशारा किया था
और फिर चुपके से
हौले – हौले तुमने
मेरा हाथ अपने हाथों में थाम लिया था
और मैंने तुम्हारे सम्मान में
अपना सर झुका लिया था ..... 

सालिहा मंसूरी
25.06.16
07.39 am  

1 comments:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

अरे वाह

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