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Saturday, 15 October 2016

तुम्हें याद है आज का दिन

तुम्हें याद है आज का दिन 
जब पहली बार मेरे कानों में 
तुम्हारी मधुर आवाज़ गूँजी थी 
उस दिन रात- भर सोई नहीं थी मैं 

लगा जैसे इक नया दोस्त मिल गया हो 
जो हर -क़दम पर मेरे साथ चल पड़ेगा 
पर ये सब कुछ कल्पना थी, भ्रम था 
या फिर कोई सपना
मैं ये आज तक समझ ही न सकी .... 

-सालिहा मंसूरी

29 .06 .15,  11:52

1 comments:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 17 अक्टूबर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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