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Sunday, 9 October 2016

इक छोटी सी लड़की

इक छोटी सी लड़की बड़ी होने पर एक औरत बन जाती है और उसमें न जाने कहाँ से हर दर्द को सहने की क्षमता आ जाती है ......
सालिहा मंसूरी

25.08.14

1 comments:

अजय कुमार झा said...

मैं जाने कितनी बार इन पंक्तियों को पढ़ कर सोच रहा हूँ कि शब्दों की ताकत खासकर कम शब्दों में इतना गहरा कह जाने की ताकत को पैदा करना कैसे आपसे सीखा जा सकता है | उम्दा ..बहुत ही नायाब , सीखने समझने लायक , माईक्रोब्लॉग्गिंग की बेमिसाल कड़ी , साझा करना जरूरी है , सादर अनुमति सहित ...

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