Thursday, 29 December 2016

तसव्वुर में चेहर तेरा

क्यों हर वक़्त रहता है
तसव्वुर में चेहर तेरा
क्यों नहीं भुला पाती
वो धुंधला सा चेहरा तेरा
क्यों याद करता है –
ये दिल
उन बीते लम्हों को बार-बार
जो बीत गया उसे ये दिल
भुला क्यों नहीं पाता ............... 



सालिहा मंसूरी

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