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Monday, 20 July 2015

दिल में इक उम्मीद का तारा

मैनें अपने उम्मीद के अस्तित्व को
आज मिटा डाला
लेकिन फिर भी
दिल में इक उम्मीद का तारा
अब भी टिमटिमा रहा है
ये तारा मुझसे बस
इक ही बात कहता है
तुम मुझे मिलोगे
कब कहाँ कैसे
मैं नहीं जानती

ये इंतजार कितना लम्बा है
मैं ये भी नहीं जानती
मेरा इंतजार करना
लाजमी है भी या नहीं
मैं नहीं जानती
बस इतना जानती हूँ
तुम मुझे मिलोगे
हाँ तुम मुझे मिलोगे ...............

-सालिहा मंसूरी 
-14.6.15 10:56 pm


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