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Tuesday, 3 January 2017

इन तन्हाईयों की राहों में

इन तन्हाईयों की राहों में
और कब तक चलना पड़ेगा
तुम्हारे बिना
इन ख़ामोशियों के अंधेरों में
और कब तक रहना पड़ेगा
तुम्हारे बिना 

यही सवाल मैं हर रोज़
दूर आसमान में चमकते
उन सितारों से करती हूँ
और वो सितारे स्थिर होकर
इकटक मुझे देखते रहते हैं
जैसे वो भी मुझसे कोई
सवाल पूँछ रहे हों .....


सालिहा मंसूरी

10.09.15   9:55 pm 

1 comments:

Digamber Naswa said...

ये सवालों का सिलसिला ही तो जीवन है ... बहुत खूब ...

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